अगर आप एक अच्छे अध्यापक हैं तो अपने विद्यार्थियों को एक ही बैच में अच्छे से सारा कंटेंट समझाएं । इसमें कुछ समय अधिक लग सकता है लेकिन विद्यार्थी को समझ मे आना जरूरी है। अगर कोई विद्यार्थी आपसे एक बार पढ़ने के बाद वही चीज़ फिर से दुबारा पढ़ने को मजबूर हो जाये तो फिर विद्यार्थी के साथ ही आपकी मेहनत में भी कमी है। आजकल कुछ विद्यार्थी वर्षों तक परीक्षा की तैयारी के मायाजाल में उलझे रहते है और अंत मे इसी उलझन में निराश होकर तैयारी छोड़ देते हैं । ये निराश विद्यार्थी फिर आगे भी कुछ अच्छा होने की उम्मीद छोड़ देते हैं, डिप्रेसन में चले जाते हैं और मानसिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। विद्यार्थियों को कक्षा में बैठने से पहले उनकी क्षमता जान लेनी आवश्यक है। उनकी रूचि जानना आवश्यक है। परीक्षा से पहले समय का निर्धारण करके ही बैच शुरू किए जाएं, ताकि अंत मे जल्दबाजी में सिलेबस नहीं करवाना पड़े। बैचों की reshuffling और merging भी जहां तक सम्भव हो, ना ही की जाए। एक गरीब विद्यार्थी को बार बार कक्षाएं लेने पर मजबूर नहीं होना पड़े क्योंकि आपके लिए 15-20 हजार रुपये कम होते हैं, उसके परिवार की महीनों की आमदनी होती है वो । कोशिश करें कि बच्चा जब आपकी क्लास समाप्त करे तो उसे ऐसा लगे कि मैंने कुछ नया सीखा है आज। जब बैच खत्म करे तो उसे लगे कि मेरे अध्यापकों की मेहनत मेरे से अधिक है। वरना माहौल बनाने को तो कक्षाओं में शायरियां और चुटकुले भी सुनाए जा सकते हैं , अध्यापक की जिम्मेदारी सबसे कठिन है। अगर आपकी रुचि नहीं है अपने विद्यार्थियों को सीखाने की, तो कृपया इस क्षेत्र को रोजगार के लिए न चुने । 🙏🙏🙏🙏🙏