Dhaka sir maths
तेरे गिरने में तेरी हार नहीं,
तू आदमी है कोई अवतार नहीं,
गिर, उठ, चल और फिर भाग,
क्योंकि जीत संक्षिप्त है,
इसका कोई सार नहीं ।।
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