कतिपय द्वारा निर्वाचन आयोग और भारत छोड़ो आंदोलन के प्रश्न पर कोर्ट केस करने की पहल की गई है। अगर यह केस रिजल्ट जारी होने के बाद किया जाता है तो स्वागत योग्य है, लेकिन रिजल्ट जारी होने से पूर्व केस करना UR के 73 से 76 प्रश्न सही करने वाले अभ्यर्थियों के लिए "जिस डाली पर बैठे उसी के काटने जैसा होगा" (अन्य कैटगरी के 1-2 प्रश्न कम करते जाए)
रिजल्ट जारी होने के पूर्व केस करने का नुकसान :
मान लो अंतिम उत्तर कुंजी से UR का कटऑफ 75/76 प्रश्न जाने वाला हो और इसी बीच कोर्ट से उक्त दोनों प्रश्न पर याचिका अनुसार निर्णय आता है तो लगभग 90% अभ्यर्थियों के अंकों में बढ़ोतरी होगी, जिसका सीधा प्रभाव कटऑफ पर पड़ेगा, क्योंकि जो कटऑफ 75/76 जाने वाला था सभी के अंक बढ़ने से कटऑफ में बढ़ोतरी निश्चित है। अब जिसके 73 से 75 होंगे, 74 से 76 होंगे वो भी कटऑफ के दायरे से बाहर हो जायेगे और अंक बढ़ने का विकल्प भी उपलब्ध नहीं होगा।
रिजल्ट जारी होने के बाद केस करने का लाभ :
मान लो अंतिम उत्तर कुंजी से UR का कटऑफ 75/76 प्रश्न जाए तो केवल प्रभावित अभ्यर्थी जो 73,74,75 पर रुके है उनके पास कोर्ट से राहत मिलने का विकल्प उपलब्ध रहेगा और कटऑफ भी नहीं बढ़ेगा। (अन्य कैटोग्री पर भी यह बात समान रूप से लागू होती हैं)
उठने वाला प्रश्न - जिसका नाम याचिका में होगा उसी के अंक बढ़ेंगे, सबके नहीं।
उत्तर (प्रतिष्ठित शासकीय अधिवक्ता द्वारा)- १. रिजल्ट जारी होने से पूर्व अगर कोर्ट का निर्णय पक्ष में आता है तो उक्त दोनों प्रश्नों का लाभ सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से प्राप्त होगा, पहला यह की, क्योंकि इन प्रश्नों को लेकर बाद में भी कोर्ट में कोई अभ्यर्थी जा सकता जिसको इसका लाभ न मिले भले वह याचिका में शामिल ना हो , दूसरा यह की, ये दोनो प्रश्न डिलीट है, इनके अंक देने के लिए पुनः प्रश्न को जोड़ना पड़ेगा और जुड़े हुए प्रश्न का लाभ सभी को समान रूप से प्राप्त होगा, क्योंकि अभी result जारी होना शेष।
२. रिज़ल्ट जारी होने के बाद अगर कोई याचिकाकर्ता याचिका लगाता है तो उसका लाभ सभी को न मिलकर केवल याचिकाकर्ता को ही मिलेगा।
पूर्व वर्षो के अधिकतर मामलों में देखा गया है सही प्रश्न को डिलीट करने पर प्री क्लियर नहीं होने से कोर्ट द्वारा अभ्यर्थी के सही उत्तर देने पर मैंस की विशेष अनुमति दी गई है।
सभी अभ्यर्थी से आग्रह है सोच विचार कर ही याचिका लगावे। रिज़ल्ट के पहले लगाया जाना ज्यादा फायदेमंद या रिज़ल्ट के बाद। सभी अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
Maths में एक सीधा सा rule है समान अंक दोनो पक्ष में जोड़े अथवा घटाए कोई फर्क नहीं पड़ता
हा जिनके गलत है उन्हे ज़रूर नुकसान होगा
केस तो रिजल्ट के पहले ही होना चाहिए